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मुसलमान: सच्चा भारतीय या राजनीतिक खिलौना

भाजपा की सरकार आयी। कांग्रेस की हार हुई। आयुष्मान भारत, उज्वला योजना जैसे कई अच्छे काम हुए। दुबारा भाजपा की सरकार आयी और कांग्रेस का सियासती दौर ढीला पड़ा। तीन तलाक़ से मुस्लिम महिलाओं को आज़ादी मिली और उनके जीवन में नए रंग भरे गए। भगवान श्रीराम जी का भव्य मंदिर बनने की तैयारी हो गयी, आस्था और विश्वास को नई मजबूती मिली।
CAA और NRC आया और मिला न्याय उन सभी उत्पीड़ित सनातनियों को जो तत्कालीन भारत के हिस्सों में यातनाएं सहते हुए पशुओं वाला जीवन व्यतीत कर रहे थे।

80 करोड़ भारतीयों ने स्वागत किया इन सब मानवता की भलाई के कार्यों का।

सब कुछ सही चलता है और एक दिन हिंसा होती है, प्रदर्शन शुरू होते हैं, पथराव होता है, आगजनी होती है।
एक समुदाय विशेष के लोग हज़ारों की संख्या में सड़कों को जाम करते हैं, बसों, रेलगाड़ियों को आग लगाते हैं और सार्वजनिक सम्पत्ति को भारी नुकसान पहुँचाते हैं।
यह विशेष समुदाय होता है मुसलमान, वे मुसलमान जो भारत को अपना घर कहते हैं और उसी को आग के हवाले करते हैं।
राजनीतिक हार का बदला लेने के लिए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और TMC जैसी पार्टियाँ इस समुदाय को उकसाती है, इनके दिलों में ज़हर घोलती हैं।
मुसलमान युवा पढ़ लिख कर भी इन पार्टियों के हाथों का खिलौना बन कर अपने ही घर को आग लगाता है और उसे बर्बाद करता है।
छात्रों के जोश का गलत इस्तेमाल किया जाता है और देश का माहौल बिगाड़ा जाता है।
जिस छात्र को अपने भविष्य, अपने माता पिता और अपने देश को ऊँचाई के शिखर तक ले जाना चाहिए वह छात्र पथराव करता है, बसों, ट्रेनों को फूंकता है और खुद को समाज का अपराधी बनाता है।

चंद रुपयों और सस्ती लोकप्रियता के लिए यह युवा अपने और अपनों के भविष्य को अंधकार में धकेलने से भी पीछे नही हटता।
जेएनयू, AMU, जामिया जैसे विश्व स्तरीय विद्यालयों में अगर राजनीतिक और आतंकी गतिविधियों का बोल बाला होगा तो देश तो बर्बाद ही समझा जाएगा।

फूट डालो राज करो की नीति कांग्रेस ने अंग्रेजों से विरासत में पाई है।
सवाल यह बनता है कि सही और सच्ची जानकारी मुस्लिम समाज क्यों नही सुनना और जानना चाहता?
क्यों कुछ रुपयों के लिए लोग अपने ही घर को अपने ही देश को जला कर राख करने पर आमादा हैं?
क्या हर मुसलमान बुरा होता है? अगर नही तो बुराई करने, तोड़ फोड़ करने वाले मुसलमानों को अच्छे मुसलमानों ने रोका क्यों नही, उन्हें समझाया क्यों नही, उन्हें सच्चाई से अवगत क्यों नही कराया?

चाहे कोई किसी भी धर्म का हो, उसका अवैध रूप से आपके घर में घुसना आपको जायज़ लगता है? उसका आपकी सम्पत्ति पर अधिकार करना और आपको प्रताड़ित करना आपको जायज़ लगता है?
क्या यह कहना सही होगा कि एक मुसलमान मुसलमान पहले है और देशभक्त बाद में?
क्या कलाम साहब पहले मुसलमान थे या देशभक्त?
अगर नागरिकता बिल से मुसलमानों को कोई परेशानी नही है तो क्या यह गुस्सा और उग्र रूप तीन तलाक और श्रीराम मंदिर के लिए निकाला जा रहा है?
क्या वजह है कि मुसलमान कभी भी भारत का नही हो पाया और हमेशा भारत को खंडित करके उसे बर्बाद करने के सपने ही सँजोता है?

अगर यह सब कोरी बकवास है तो हक़ीक़त क्या है? मुसलमान भारत का सगा है तो फिर ये बर्बादी का आलम क्यों?

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